तू जो रातो को उठ के रोता है,
आह ! क्यूँ अपनी जान खोता है,
"हम तुम्हे चाहते है,तुम हमको
"बस फसानो ही मे ये होता है" !!!
इन आँसुओ को टपकने दिया न था मैने,
कि खाक मे न मिले मेरी आँख के तारे,
मै इनको ज़ब्त न करता अगर खबर होती,
पहुँच के दिल मे बन जायेंगे ये अंगारे !!!!
सागरो की खनक खरीदी है,
दोस्ती के भरम खरीदे है,
आरज़ू-ए-निशात मै हमने,
कैसे दिलचस्प गम खरीदे है !!!
तेरी तलाश मे निकले है आज दीवाने,
कहाँ सहर हो कहाँ शाम यह खुदा जाने,
हरम हमी से हमी से है आज बुतखाने,
यह बात और है दुनिया हमे न पहचाने !!!
अब इश्को-मुहब्बत के वो नग्मे न रहे,
सीने मे है आज दिल की धडकन खाली,
जिस तरह चहककर कोई उड जाये पंछी,
और जैसे लचकती रहे सूनी सी डाली !!!
गज़ब है जुस्तजु-ए-दिल का यह अंज़ाम हो जाये,
कि मंज़िल दूर हो और रास्ते मे शाम हो जाये,
अभी तो दिल मे हल्की सी खलिश मालूम होती है,
बहुत मुमकिन है कल इसका मुहब्बत नाम हो जाये !!!
मेरे गमख्वार! मेरे दोस्त! तुझे क्या मालूम,
ज़िन्दगी मौत के मानिन्द गुज़ारी मैने,
एक बिगडी हुई सूरत के सिवा कुछ भी न था,
जब भी हालात की तस्वीर उतारी मैने !!!
6 comments:
bahut hi sudar lafaz dil ko chute hue ...sundar rachna ke liye badhaai[:)]
heh baby why are you so sad. But your sadness is a bliss for us as you write such nice poems.
सुन्दर...
तेरी तलाश मे निकले है आज दीवाने,
कहाँ सहर हो कहाँ शाम यह खुदा जाने,
लिखते रहिये दीपक जी...
बाखूबी व्यक्त किया है आपने....
bahut hi achha likhte hain aap
mujhe aapko pahli baar padhna achha laga
तेरी तलाश मे निकले है आज दीवाने,
कहाँ सहर हो कहाँ शाम यह खुदा जान
bhaut khoob
wah deepak ji kamal likha hai....maza aa gaya pad kar...... shukriyaa
good very good just keep going . u can start writing in news papers or publish a book agra having some very good publishers.any way dil khush hua ,kuch jajbat sab ke undar hote hai jinhe kuch aap jaise lok bahut hi khubsurti ki sath bayan karthe hai RADHASOAMI
VIKRAM N SALONI
Post a Comment