Tuesday, July 27, 2010

हुनर

मै इस गम के समुद्र से गुज़र क्यूँ नही जाता,
मरना जब हर हाल मे है तो मर क्यूँ नही जाता !!
ये वक़्त के हाथो मे जो महकता हुआ खंज़र है,
ये खंज़र कलेजे मे इक साथ उतर क्यूँ नही जाता !!
यूँ ही अपनी ज़िन्दगी को लिये फिर रहा हूँ मै,
मै ज़िन्दगी को लेकर अब ठहर क्यूँ नही जाता !!
ज़िन्दगी को लोग गुज़ार देते है गिरगिट की तरह,
शुक्र है खुदा मेरे यह हुनर मुझको नही आता !!

1 comment:

Minakshi Pant said...

कविता के माध्यम से अपना परिचय बताने की सफल कोशिश |
खुबसूरत रचना |