Sunday, July 29, 2007

नई रोशनी




क्यूँ मेरी अंगुलियाँ थकने लगी है?
क्यूँ मेरे लब थरथरा रहे है?
आज मै अपने गीतो से शर्मा रहा हूँ,
और मेरे गीत मुझसे शर्मा रहे है..
वो गीत मुझे आज बेज़ान लगते है....
जो कि मेरे दिल के जज़्बात थे,
जिन्हे कोरे कागज़ पर मैने उकेरा था,
और उस क़लम को भी तोड देना चाहता हूँ,
जिसने लोगो के दिल के तारो को छेडा था,
आज मेरे हाथो मे क्रांति की मशाल दे दो..
.जिसकी रोशनी से,
मै हटा दूँ घने स्याह अँधेरो को,
और अपने इस दिल की तडप से आज फिर,
उगा दूँ नई सुबह और सवेरो को...
अब तो दिल का आलम यही है...
कि सारे आलम पे छा जाना चाहता हूँ,
करके क़ुर्बान ये जीवन इस ज़मी के लिये,
इक नई रोशनी जलाना चाहता हूँ...!!!!

10 comments:

Anonymous said...

good effort, try to write songs so bollywood can get a good song writer.

रंजू भाटिया said...

अब तो दिल का आलम यही है...
कि सारे आलम पे छा जाना चाहता हूँ,
करके क़ुर्बान ये जीवन इस ज़मी के लिये,
इक नई रोशनी जलाना चाहता हूँ...!!!!

wah wah bahut khoob deepak ji ..bahut hi sundar

Anonymous said...

mind blowing lines deepak ji
suchhhhhhhhhhhhhh
keep it up dost

Ratna said...

It's ecstacy.

shruti said...

bahut aacha hai deepak jee.. khushi hue aapko yahan dekh kar... likhte rahiye:)

अमिय प्रसून मल्लिक said...

Achchhi lagi aapki rachnaayein.

गीता पंडित said...

मै हटा दूँ घने स्याह अँधेरो को,
और अपने इस दिल की तडप से आज फिर,
उगा दूँ नई सुबह और सवेरो को...

wah......

bahut sundar..deepak ji
aapko padakar achhaa lagaa

aabhaar

vijendra sharma said...

क्यूँ मेरी अंगुलियाँ थकने लगी है?
क्यूँ मेरे लब थरथरा रहे है?
आज मै अपने गीतो से शर्मा रहा हूँ,

ye panktiyan dil ko chooo gaiee .


regards..................

Guman singh said...

bahut shandar likh hai.. mere dost. ye line maine meri profile me dali he, copy k liye sorry... bye

divya said...

bahut bahut bahut sundar rachna......padh kar josh aa gaya....wah......