क्यूँ मेरी अंगुलियाँ थकने लगी है?
क्यूँ मेरे लब थरथरा रहे है?
आज मै अपने गीतो से शर्मा रहा हूँ,
और मेरे गीत मुझसे शर्मा रहे है..
वो गीत मुझे आज बेज़ान लगते है....
जो कि मेरे दिल के जज़्बात थे,
जिन्हे कोरे कागज़ पर मैने उकेरा था,
और उस क़लम को भी तोड देना चाहता हूँ,
जिसने लोगो के दिल के तारो को छेडा था,
आज मेरे हाथो मे क्रांति की मशाल दे दो..
.जिसकी रोशनी से,
मै हटा दूँ घने स्याह अँधेरो को,
और अपने इस दिल की तडप से आज फिर,
उगा दूँ नई सुबह और सवेरो को...
अब तो दिल का आलम यही है...
कि सारे आलम पे छा जाना चाहता हूँ,
करके क़ुर्बान ये जीवन इस ज़मी के लिये,
इक नई रोशनी जलाना चाहता हूँ...!!!!
क्यूँ मेरे लब थरथरा रहे है?
आज मै अपने गीतो से शर्मा रहा हूँ,
और मेरे गीत मुझसे शर्मा रहे है..
वो गीत मुझे आज बेज़ान लगते है....
जो कि मेरे दिल के जज़्बात थे,
जिन्हे कोरे कागज़ पर मैने उकेरा था,
और उस क़लम को भी तोड देना चाहता हूँ,
जिसने लोगो के दिल के तारो को छेडा था,
आज मेरे हाथो मे क्रांति की मशाल दे दो..
.जिसकी रोशनी से,
मै हटा दूँ घने स्याह अँधेरो को,
और अपने इस दिल की तडप से आज फिर,
उगा दूँ नई सुबह और सवेरो को...
अब तो दिल का आलम यही है...
कि सारे आलम पे छा जाना चाहता हूँ,
करके क़ुर्बान ये जीवन इस ज़मी के लिये,
इक नई रोशनी जलाना चाहता हूँ...!!!!
10 comments:
good effort, try to write songs so bollywood can get a good song writer.
अब तो दिल का आलम यही है...
कि सारे आलम पे छा जाना चाहता हूँ,
करके क़ुर्बान ये जीवन इस ज़मी के लिये,
इक नई रोशनी जलाना चाहता हूँ...!!!!
wah wah bahut khoob deepak ji ..bahut hi sundar
mind blowing lines deepak ji
suchhhhhhhhhhhhhh
keep it up dost
It's ecstacy.
bahut aacha hai deepak jee.. khushi hue aapko yahan dekh kar... likhte rahiye:)
Achchhi lagi aapki rachnaayein.
मै हटा दूँ घने स्याह अँधेरो को,
और अपने इस दिल की तडप से आज फिर,
उगा दूँ नई सुबह और सवेरो को...
wah......
bahut sundar..deepak ji
aapko padakar achhaa lagaa
aabhaar
क्यूँ मेरी अंगुलियाँ थकने लगी है?
क्यूँ मेरे लब थरथरा रहे है?
आज मै अपने गीतो से शर्मा रहा हूँ,
ye panktiyan dil ko chooo gaiee .
regards..................
bahut shandar likh hai.. mere dost. ye line maine meri profile me dali he, copy k liye sorry... bye
bahut bahut bahut sundar rachna......padh kar josh aa gaya....wah......
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