Saturday, August 4, 2007

ऎ दोस्त ! मेरे दिल की सुन

ऎ दोस्त मेरे दोस्त ! मेरे दिल की सुन
तेरी दोस्ती वो जज़्बा है मेरे लिये
जिस पे मै अपनी जाँ निसार करता हूँ
सच तो यह है कि आज खुद से ज्यादा
तेरी दोस्ती पे ऎतबार करता हूँ !!

वो तेरी दोस्ती ही थी जिसने मुझे
गम के समुन्दर से बाहर निकाला था
जब भी लगते थे कदम मेरे डगमगाने
तूने खुद ही बढकर मुझे सम्भाला था !!

मेरे दिल की बस्ती को बसाया है तूने
अन्धेरे घर मे दिया जलाया है तूने
जब भी काँटे चुभे दिल की गहराई मे
इस रोते हुए दिल को हँसाया है तूने !!

ऎ दोस्त ! तेरा प्यार ही बहुत है मेरे लिये
फक़त तेरा दीदार ही बहुत है मेरे लिये
खुदा से मै अब और कुछ नही माँगता
तेरी दोस्ती का उपहार ही बहुत है मेरे लिये !!!

6 comments:

मनोहर लाल रत्नम said...

मित्रता दिवस पर मेरी तरफ से आपको व मेरे प्यारे मित्र कवियों की तरफ से इस कविता पर हार्दिक धन्यवाद

कोटि कोटि शुभकामनाये...
आप का जीवन निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे...
बहुत बहुत आभार्....
आपका रत्नम

रंजू भाटिया said...

bahut hi sundar rachana hai
meri taraf se bahut bahut shubkamanye !!

Anonymous said...

no doubt............its vry beautiful..........bt i want to ask dat does dis frndshp exixts in reality also..........?

Anonymous said...

dushmano ne hame baksh dia, tere jaise dost dekh kar, bole yar es se to hi nidat lega hum kahi aur lage.

अमिय प्रसून मल्लिक said...

achchhi lagi apki rachna.

divya said...

mitrata k ehsaas se rubaru karati behatren rachna......